leta hua hooñ saaya-e-ghurbat men ghar se door | लेटा हुआ हूँ साया-ए-ग़ुर्बत में घर से दूर

  - Altaf Mashhadi
लेटाहुआहूँसाया-ए-ग़ुर्बतमेंघरसेदूर
दिलसेक़रींहैंअहल-ए-वतनऔरनज़रसेदूर
जबतकहैदिलरहीन-ए-मआल-ओ-असीर-ए-अक़्ल
रहनाहैतुझसेऔरतिरीरहगुज़रसेदूर
कैफ़उनकीमस्तनिगाहोंमेंछुपके
दर्द-ए-दमज़दनमेंहोमेरेजिगरसेदूर
इकदिनउलटनेवालीहैज़ाहिदबिसात-ए-ज़ोहद
कबतकरहेगादिलनिगह-ए-फ़ित्ना-गरसेदूर
वोकोईज़िंदगीहैजवानीहैवोकोई
दोस्तजोहैतेरेजमाल-ए-नज़रसेदूर
क्याआईतेरेजीमेंकितक़दीरयूँँमुझे
फेंकाहैलाकेवादी-ए-ग़ुर्बतमेंघरसेदूर
हुस्न-ए-बे-पनाहबताएकोईमुझे
दुनियाकीकौनचीज़हैतेरेअसरसेदूर
अल्लाहरेनसीबकिपाईहैवोफ़ुग़ाँ
जोउम्रभररहीहैफ़रेब-ए-असरसेदूर
'अलताफ़'नाज़अपनीगदाईपेहैमुझे
दामनहैउसकासाया-ए-लाल-ओ-गुहरसदूर
  - Altaf Mashhadi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy