nazaakat mohabbat ka gham kha rahi hai | नज़ाकत मोहब्बत का ग़म खा रही है

  - Altaf Mashhadi
नज़ाकतमोहब्बतकाग़मखारहीहै
मोहब्बतमोहब्बतहुईजारहीहै
तुम्हारीनज़रकेहसींमय-कदोंमें
उरूस-ए-ख़राबातइठलारहीहै
नज़रक्यालड़ीएकख़ंदाँनज़रसे
जवानीतबस्सुमबनीजारहीहै
तसव्वुरकेहाथोंमेंदेकरखिलौने
जवानीमोहब्बतकोबहलारहीहै
येक्याबातहैअजनबीअँखड़ियोंसे
कोईजानी-बूझीसदारहीहै
फूलोंकीरुतहैकलियोंकामौसम
मगरबुलबुल-ए-बे-नवागारहीहै
ये'अलताफ़'कौनगयावक़्त-ए-आख़िर
क़ज़ानर्म-ओ-शीरींहुईजारहीहै
  - Altaf Mashhadi
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