bahr-e-hasti koi saraab nahin | बहर-ए-हस्ती कोई सराब नहीं

  - Altaf Mashhadi
बहर-ए-हस्तीकोईसराबनहीं
ज़िंदगीज़िंदगीहैख़्वाबनहीं
आहइंसानजिसकीआँखोंपर
अपनाअंजामबे-नक़ाबनहीं
एकख़ुर्शीद-रुख़कीज़ुल्फ़ोंका
रातकेपासकुछजवाबनहीं
ज़िंदगीदर्दसेहुईमहरूम
मै-कदाहैमगरशराबनहीं
मुतरिब-ए-वक़्ततेरेहाथोंमें
क्यूँहैतलवारऔररबाबनहीं
आदमीआदमीकाराज़िक़है
नज़्म-ए-आलममगरख़राबनहीं
हाए'अलताफ़'वोहज़ींरातें
जिनकीक़िस्मतमेंमाहताबनहीं
  - Altaf Mashhadi
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