tujhe yaad kya nahin hai mire dil ka vo zamaana | तुझे याद क्या नहीं है मिरे दिल का वो ज़माना

  - Allama Iqbal
तुझेयादक्यानहींहैमिरेदिलकावोज़माना
वोअदब-गह-ए-मोहब्बतवोनिगहकाताज़ियाना
येबुतान-ए-अस्र-ए-हाज़िरकिबनेहैंमदरसेमें
अदा-ए-काफ़िरानातराश-ए-आज़राना
नहींइसखुलीफ़ज़ामेंकोईगोशा-ए-फ़राग़त
येजहाँअजबजहाँहैक़फ़सआशियाना
रग-ए-ताकमुंतज़िरहैतिरीबारिश-ए-करमकी
किअजमकेमय-कदोंमेंरहीमय-ए-मुग़ाना
मिरेहम-सफ़ीरइसेभीअसर-ए-बहारसमझे
उन्हेंक्याख़बरकिक्याहैयेनवा-ए-आशिक़ाना
मिरेख़ाकख़ूँसेतूनेयेजहाँकियाहैपैदा
सिला-ए-शाहिदक्याहैतब-ओ-ताब-ए-जावेदाना
तिरीबंदा-परवरीसेमिरेदिनगुज़ररहेहैं
गिलाहैदोस्तोंकाशिकायत-ए-ज़माना
  - Allama Iqbal
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy