jab ishq sikhaata hai aadaab-e-khud-aagaahi | जब इश्क़ सिखाता है आदाब-ए-ख़ुद-आगाही

  - Allama Iqbal
जबइश्क़सिखाताहैआदाब-ए-ख़ुद-आगाही
खुलतेहैंग़ुलामोंपरअसरार-ए-शहंशाही
'अत्तार'हो'रूमी'हो'राज़ी'हो'ग़ज़ाली'हो
कुछहाथनहींआताबे-आह-ए-सहर-गाही
नौमीदहोइनसेरहबर-ए-फ़रज़ाना
कम-कोशतोहैंलेकिनबे-ज़ौक़नहींराही
ताइर-ए-लाहूतीउसरिज़्क़सेमौतअच्छी
जिसरिज़्क़सेआतीहोपर्वाज़मेंकोताही
दारासिकंदरसेवोमर्द-ए-फ़क़ीरऔला
होजिसकीफ़क़ीरीमेंबू-ए-असदूल-लाही
आईन-ए-जवाँ-मर्दांहक़-गोईबे-बाकी
अल्लाहकेशे'रोंकोआतीनहींरूबाही
  - Allama Iqbal
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