har subh main patthar ki tarah sakht banaa hooñ | हर सुब्ह मैं पत्थर की तरह सख़्त बना हूँ

  - Aliuddeen Naved
हरसुब्हमैंपत्थरकीतरहसख़्तबनाहूँ
शामआतेहीशीशेकीतरहटूटगयाहूँ
गिरतीहुईदीवारकेसाएमेंठहरकर
चढ़तेहुएसूरजकीतरफ़देखरहाहूँ
इकबारकिसीनेमुझेदीवानाकहाथा
अबतकउसीलहजेकीअदाढूँडरहाहूँ
तुमसुब्हकेदीवानमेंशादाबखड़ीहो
मैंरातकीदलदलमेंउतरताहीचलाहूँ
मैंअबभीतिरीरेशमीपलकोंकीज़मींपर
सय्यालनगीनोंकीचमकबनकेखड़ाहूँ
  - Aliuddeen Naved
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