khayaalaat rangeen nahin bolte us ko jyuun baas phoolon ke rangon men rahiye | ख़यालात रंगीं नहीं बोलते उस को ज्यूँँ बास फूलों के रंगों में रहिए

  - Alimullah
ख़यालातरंगींनहींबोलतेउसकोज्यूँँबासफूलोंकेरंगोंमेंरहिए
दो-रंगीसूँजानागुज़रदिलसूँअव्वलबज़ाँजाकेवाँएकरंगोंमेंरहिए
वोवहशतकेजंगलमेंहोकरपरेशाँपहाड़ोंसेग़मकेहोसंगहरगिज़
शररहोकेछिड़संगतिनकेसूँजल्दीसकलरूहहोबर्क़रंगोंमेंरहिए
नहींमौज-ए-दरियाकीदहशतउसेजोकिमाराहैग़ोताहोग़व्वासदिलमें
तह-ए-बहर-ए-वहदतमेंग़व्वासहोनेकोतालीमपानेनहंगोंमेंरहिए
शहादतमिलेचारतनसूँतुझेगरकरेक़त्लतूपाँचमूज़ियाँकूँदिलके
शहीदोंकीरहसाथहरवक़्तहमदमहोज्यूँँशे'रशे'रानजंगोंमेंरहिए
फ़लकचर्ख़-ए-कज-रौसूँदेखेअगरख़ूबनैरंग-बाज़ीज़मानेकीहिकमत
गुज़रग़ैरसोहबतसूँमदहोशहोजापहाड़ोंमेंजाकरभुजंगोंमेंरहिए
समझ'अलीम'आजराह-ए-हक़ीक़तनिपटसख़्तमुश्किलहैजाँसूँगुज़रना
पतंगहोकेजलनेमेंवासिलरहेंहक़सूँहोमर्द-ए-वाहिदयकंगोंमेंरहिए
  - Alimullah
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy