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Ali Mohammed Shaikh
nazar ab khwaab se aankhoñ ki kuchh banti nahin aati
nazar ab khwaab se aankhoñ ki kuchh banti nahin aati | नज़र, अब ख़्वाब से आँखों की कुछ बनती नहीं आती
- Ali Mohammed Shaikh
नज़र,
अब
ख़्वाब
से
आँखों
की
कुछ
बनती
नहीं
आती
कई
दिन
से
पड़ोसी
छत
पे
वो
लड़की
नहीं
आती
यही
आदत
तग़ाफ़ुल
की
बुरी
लगती
तुम्हारी
है
इधर
हम
याद
करते
है,
उधर
हिचकी
नहीं
आती
- Ali Mohammed Shaikh
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अब
तो
उन
की
याद
भी
आती
नहीं
कितनी
तन्हा
हो
गईं
तन्हाइयाँ
Firaq Gorakhpuri
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अब
बिछड़ने
पर
समझ
पाते
हैं
हम
इक
दूसरे
को
इम्तिहाँ
के
ख़त्म
हो
जाने
पे
हल
याद
आ
रहा
है
Nishant Singh
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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मुद्दतें
हो
गईं
बिछड़े
हुए
तुम
से
लेकिन
आज
तक
दिल
से
मिरे
याद
तुम्हारी
न
गई
Akhtar Shirani
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ख़याल
कब
से
छुपा
के
ये
मन
में
रक्खा
है
मिरा
क़रार
तुम्हारे
बदन
में
रक्खा
है
Siraj Faisal Khan
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कितने
नादाँ
हैं
तेरे
भूलने
वाले
कि
तुझे
याद
करने
के
लिए
उम्र
पड़ी
हो
जैसे
Ahmad Faraz
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बारे
दुनिया
में
रहो
ग़म-ज़दा
या
शाद
रहो
ऐसा
कुछ
कर
के
चलो
याँ
कि
बहुत
याद
रहो
Meer Taqi Meer
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दिलों
को
तेरे
तबस्सुम
की
याद
यूँँ
आई
कि
जगमगा
उठें
जिस
तरह
मंदिरों
में
चराग़
Firaq Gorakhpuri
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ज़रा
देर
बैठे
थे
तन्हाई
में
तिरी
याद
आँखें
दुखाने
लगी
Adil Mansuri
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ज़ख़्म
लगे
हैं
कितने
दिल
पर
याद
करूँँ
या
तुमको
देखूँ
शाद
नहीं
हूँ
मैं
तुमको
नाशाद
करूँँ
या
तुमको
देखूँ
उम्र
गए
पे
तेरी
सूरत
और
मिरी
आँखें
टकराईं
उम्र
गए
में
सोची
वो
फ़रियाद
करूँँ
या
तुमको
देखूँ
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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दिन
ब
दिन
पहले
से
भी
और
खिल
के
आई
हो
सच
बताना
आज
फिर
किस
से
मिलके
आई
हो
दर्जी
वाले
चौक
पर
तो
कल
से
है
बंदिश
लगी
अब
न
कहना
तुम
वहा
से
कपड़े
सिल
के
आई
हो
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Ali Mohammed Shaikh
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देख
रहे
हो
ख़ामोशी
जो
तूफ़ानों
का
इशारा
है
अब
जो
साथ
मुसीबत
में
है
वो
ही
दोस्त
हमारा
है
Ali Mohammed Shaikh
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बातें
बना
रहा
है
नज़रे
बदल
रहा
है
कुछ
तो
है
यार
की
जो
निय्यत
में
चल
रहा
है
Ali Mohammed Shaikh
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सामने
वो
नज़र
के
रहे
इस
लिए
उसकी
बस्ती
में
ही
काम
पर
लग
गए
वो
तो
आया
नहीं
हाथ
मेरे
मगर
हाथ
इसके
बहाने
हुनर
लग
गए
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Ali Mohammed Shaikh
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ज़रा
ज़रा
सी
बात
पे
यूँ
इल्तेफात
रखोगे
बताओं
कैसे
उम्र
भर
का
तालुकात
रखोगे
Ali Mohammed Shaikh
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