KHaak hooñ toor samajh aur jila de mujh ko | ख़ाक हूँ तूर समझ और जिला दे मुझ को

  - alii maan azfar
ख़ाकहूँतूरसमझऔरजिलादेमुझको
ख़ुदाअपनीतजल्लीकीज़ियादेमुझको
मौलामज्ज़ूबमिनल्लाहबनादेमुझकोइश्क़-ए-सादिक़कीयूँँमेराजकरादेमुझको
ऐसीकोईभीयारदु'आदेमुझको
मरहीजाऊँकोईऐसीतोसज़ादेमुझको
रोज़-ए-महशरतोअभीदूरहैमेरेअल्लाह
करकोईमो'जिज़ाऔरख़ुदसेमिलादेमुझको
नहींकरनाहैमुझेइश्क़-ए-मजाज़ीकिसीसे
मौलाइश्क़-ए-अज़लीकरनासिखादेमुझको
आजरोतेहुएमैंनेतोउसेकहदियाहै
किमैंदरवेशसिफ़तहूँतूभुलादेमुझको
तंगआनेलगाहूँज़िंदगीकीउलझनोंसे
अपनीक़ुदरतसेख़ुदाराह-ए-फ़नादेमुझको
दर्दएहसासख़ुशीजैसीकोईचीज़हो
तूहीतूहोब-ख़ुदाऐसीफ़ज़ादेमुझको
तेराएहसासजिलाताहैमिरादामन-ए-यार
भूलजाऊँतुझेतौफ़ीक़-ए-ख़ुदादेमुझको
मेरीमंज़िलकापतापूछतेहैंमुझसेलोग
कुछतोकरऐसातमाशाहीबनादेमुझको
  - alii maan azfar
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