hijr ke gham main kha ke laata hooñ | हिज्र के ग़म मैं खा के लाता हूँ

  - alii maan azfar
हिज्रकेग़ममैंखाकेलाताहूँ
ख़्वाबअपनेमनाकेलाताहूँ
सचकीहिद्दतसेकामलेतेहो
झूटकोमैंबुलाकेलाताहूँ
क्याकहाचाँदचाहिएबैठो
आजवोभीचुराकेलाताहूँ
ख़्वाबमेंजोवोसाथहोतीहै
उसकोदुल्हनबनाकेलाताहूँ
क्यातुम्हेंतोहफ़ाचाहिएठहरो
हाथोंपरसरसजाकेलाताहूँ
इश्क़मुझपरअसरनहींकरता
रोज़उसकोघुमाकेलाताहूँ
इसमोहब्बतपेतुमयक़ींकरलो
हुक्मसारेख़ुदाकेलाताहूँ
डूबजाताहैक्यूँँयहाँहरबार
राज़मैंना-ख़ुदाकेलाताहूँ
कुछअसरहोताहीनहींउसपर
शे'रकितनेबनाकेलाताहूँ
अपनेहाथोंसेसौंपनामुझको
अपनेग़मकोमनाकेलाताहूँ
  - alii maan azfar
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