savaad-e-shauq-o-talab gham ka baab aisa tha | सवाद-ए-शौक़-ओ-तलब ग़म का बाब ऐसा था

  - Ali Wijdan
सवाद-ए-शौक़-ओ-तलबग़मकाबाबऐसाथा
जलाकेख़ाककियाइज़्तिराबऐसाथा
बहुतहीतल्ख़थाया'नीशराबऐसाथा
सवालयादनहींहैजवाबऐसाथा
तमाज़तोंनेग़म-ए-हिज्रकीउजाड़दिया
बदनथाफूलसाचेहराकिताबऐसाथा
मैंकाँपकाँपगयाहूँब-नाम-ए-सूद-ओ-ज़ियाँ
शुमार-ए-ज़ख़्म-ए-हुनरकाजवाबऐसाथा
सुलगरहेथेमिरेहोंटजलरहाथाबदन
ज़बाँसेकुछकहाथाहिजाबऐसाथा
मिरीतलबहीबनीमेरेपाँवकीज़ंजीर
भटकरहाहूँमैंअबतकसराबऐसाथा
झुलसकेरहगयाचेहरातमामख़्वाबोंका
ख़ुमार-ए-तिश्ना-लबीकाअज़ाबऐसाथा
वोअहद-ए-गुमरहीकहताहैउसकीमर्ज़ीहै
जोदेखलेतूतड़पजाएख़्वाबऐसाथा
बहुतहीज़ो'मथाअपनीमोहब्बतोंपेउसे
निभासकावफ़ाकामयाबऐसाथा
रफ़ाक़तोंकाफ़ुसूँटूटनाहीथा'विज्दान'
सफ़रमेंछोड़गयाहैख़राबऐसाथा
  - Ali Wijdan
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