ai neesh-e-ishq tere khareedaar kya hue | ऐ नीश-ए-इश्क़ तेरे ख़रीदार क्या हुए

  - Ali Wijdan
नीश-ए-इश्क़तेरेख़रीदारक्याहुए
थीजिनकेदमसेरौनक़-ए-बाज़ारक्याहुए
बोलहवा-ए-शामवोबीमारक्याहुए
मोनिसतिरेरफ़ीक़तिरेयारक्याहुए
जुर्म-ए-इश्क़तेरेगुनहगारक्याहुए
दोस्ततेरेहिज्रकेबीमारक्याहुए
रस्म-ए-वफ़ाकाज़िक्रतोअबज़िक्ररहगया
वोपैकर-ए-वफ़ावोवफ़ादारक्याहुए
कम-शनासवक़्ततुझेयादतकनहीं
वोज़ख़्म-ए-जान-ओ-दिलकेतलबगारक्याहुए
कार-ए-जुनूँमेंजिनकेहुएआमतज़्किरे
फ़स्ल-ए-जुनूँबतावोख़ुद-आज़ारक्याहुए
जोश-ओ-नदीम-ओ-फ़ैज़भीबैठेहैंहारके
पहुँचेथेजोजुनूँमेंसर-ए-दारक्याहुए
ज़िंदान-ए-तीरगीमेंमुक़य्यदहैंआजभी
पैदाहुएथेसुब्हकेआसारक्याहुए
'विज्दान'आशिक़ीमेंगँवानीथीजानभी
प्यारेवोतेरेतौरवोअतवारक्याहुए
  - Ali Wijdan
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