kam-zarf ehtiyaat ki manzil se aa.e hain | कम-ज़र्फ़ एहतियात की मंज़िल से आए हैं

  - Ali Jawwad Zaidi
कम-ज़र्फ़एहतियातकीमंज़िलसेआएहैं
हमज़िंदगीकेजादा-ए-मुश्किलसेआएहैं
गिर्दाबमहव-ए-रक़्सहैतूफ़ानमहव-ए-जोश
कुछलोगशौक़-ए-मौजमेंसाहिलसेआएहैं
येवज़-ए-ज़ब्त-ए-शौक़किदिलजलबुझामगर
शिकवेज़बाँपेआजभीमुश्किलसेआएहैं
आँखोंकासोज़दिलकीकसकतोनईंमिली
मानाकिआपभीउसीमहफ़िलसेआएहैं
येक़श्क़ा-ए-ख़ुलूसहैज़ख़्म-ए-जबींनहीं
हरचंदहमभीकूचा-ए-क़ातिलसेआएहैं
दिलकालहूनिगाहसेटपकाहैबार-हा
हमराह-ए-ग़ममेंऐसीभीमंज़िलसेआएहैं
दिलइकउदाससुब्हनज़रइकउदासशाम
कैसेकहेंकिदोस्तकीमहफ़िलसेआएहैं
छेड़ाथानोक-ए-ख़ारनेलेकिनगुमाँहुआ
ताज़ापयामपर्दा-ए-महमिलसेआएहैं
हाँगाएजामुग़न्नी-ए-बज़्म-ए-तरबकिआज
नग़्मेंतिरीज़बाँपेमिरेदिलसेआएहैं
  - Ali Jawwad Zaidi
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