baarish ke ghanghor hawaale ginata rehta hooñ | बारिश के घनघोर हवाले गिनता रहता हूँ

  - Ali Imran
बारिशकेघनघोरहवालेगिनतारहताहूँ
लम्हालम्हाबादलकालेगिनतारहताहूँ
सदियाँगुज़रींख़्वाबोंकोआँखोंमेंआए
पलकोंपरमकड़ीकेजालेगिनतारहताहूँ
ऊपरवालामंज़िलमुझकोदिखलाताहै
औरमैंअपनेपैरकेछालेगिनतारहताहूँ
तारीकीकीलाशेंगिननाकितनामुश्किलहै
दिनकेआदम-ख़ोरउजालेगिनतारहताहूँ
मेरीछाँवकेटुकड़ेखाताजाताहैसूरज
मैंआँगनमेंबैठनिवालेगिनतारहताहूँ
पानीकितनाऊपरहोतोडूबूँगामैं
कितनेपत्थरअबतकडालेगिनतारहताहूँ
दुनियातारेगिनतेगिनतेसोतीहैयार
मैंबे-चाराचाँदकेहालेगिनतारहताहूँ
  - Ali Imran
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