charaaghh shaam se aaKHir jalaaen kis ke li.e | चराग़ शाम से आख़िर जलाएँ किस के लिए

  - Aleem Usmani
चराग़शामसेआख़िरजलाएँकिसकेलिए
कोईआएगाआँखेंबिछाएँकिसकेलिए
खिंचाखिंचानज़रआताहैहमसेहरआँचल
सितारेतोड़केलाएँतोलाएँकिसकेलिए
नहींहैकोईहमेंज़िंदगीकाशौक़मगर
हमअपनीजानसेजाएँतोजाएँकिसकेलिए
सितमउठानेकामक़्सदभीकोईहोताहै
हमआसमानसेशर्तेंलगाएँकिसकेलिए
ख़िलाफ़हमनहींअख़्तर-शुमारियोंकेमगर
सवालयेहैकिनींदेंगंवाएँकिसकेलिए
वफ़ाइकआगहैबच्चोंकाकोईखेलनहीं
हमअपनामुफ़्तमेंदामनजलाएँकिसकेलिए
शराबहमपेहमेशासेहैहराम'अलीम'
पतानहींयेउठीहैंघटाएँकिसकेलिए
  - Aleem Usmani
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