ik raaz-e-gham-e-dil jab KHud rah na sakaa dil tak | इक राज़-ए-ग़म-ए-दिल जब ख़ुद रह न सका दिल तक

  - Aleem Masroor
इकराज़-ए-ग़म-ए-दिलजबख़ुदरहसकादिलतक
होनेदोयेरुस्वाईतुमतकहोकिमहफ़िलतक
अफ़्सानामोहब्बतकापूराहोतोकैसेहो
कुछहैदिल-ए-क़ातिलतककुछहैदिल-ए-बिस्मिलतक
बसएकनज़रजिसकीआतिश-ज़न-ए-महफ़िलहै
वोबर्क़-ए-मुजस्समहैमहदूदमिरेदिलतक
येराह-ए-मोहब्बतहैसबइसमेंबराबरहैं
भटकेहुएराहीसेखिज़र-ए-रह-ए-मंज़िलतक
हैअज़्म-ए-जवाँसबकुछतूफ़ान-ए-हवादिसमें
साहिलकाभरोसाकियायेजाताहैसाहिलतक
  - Aleem Masroor
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy