mirii dastaras men hai gar qalam mujhe husn-e-fikr-o-khayaal de | मिरी दस्तरस में है गर क़लम मुझे हुस्न-ए-फ़िक्र-ओ-ख़याल दे

  - Alamtaab Tishna
मिरीदस्तरसमेंहैगरक़लममुझेहुस्न-ए-फ़िक्र-ओ-ख़यालदे
मुझेशहरयार-ए-सुख़नबनाऔरएनान-ए-शहर-ए-कमालदे
मिरीशाख़-ए-शेररहेहरीदेमिरेसुख़नकोसनोबरी
मिरीझीलमेंभीकँवलखिलामिरीगुदड़ियोंकोभीला'लदे
तिरीबख़्शिशोंमेंहैसरवरीमिरेइश्क़कोदेक़लंदरी
जोउठेतोदस्त-ए-दुआलगेमुझेऐसादस्त-ए-सवालदे
रग-ए-जाँमेंजमनेलगालहूउसेमुश्कबननेकीआरज़ू
हैउदासदश्त-ए-ततार-ए-दलउसेफिरशलंग-ए-ग़ज़ालदे
कोईबातअक़रब-ओ-शम्सकीकोईज़िक्र-ए-ज़ोहरा-ओ-मुशतरी
तूबड़ासितारा-शनासहैमुझेकोईअच्छीसीफ़ालदे
हैंयेजिस्म-ओ-जाँकीक़ुयूदक्याख़द-ओ-ख़ालकेयेहुदूदक्या
मैंहूँअक्स-ए-मंज़र-ए-मावरामुझेआइनोंसेनिकालदे
मैंवहीहूँ'तिश्ना'-ए-बा-वफ़ामिराआजभीवहीमुद्दआ'
फ़िराक़देमुझेमुस्तक़िलमुझेहमेशाविसालदे
  - Alamtaab Tishna
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