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Ankit Yadav
ab is kamre men sab bikhra hua hai
ab is kamre men sab bikhra hua hai | अब इस कमरे में सब बिखरा हुआ है
- Ankit Yadav
अब
इस
कमरे
में
सब
बिखरा
हुआ
है
यहाँ
पर
कोई
अलमारी
नहीं
है
वो
इतनी
तेज़
लड़की
है
कि
उसको
समझ
लेना
समझदारी
नहीं
है
- Ankit Yadav
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बड़े
अदब
से
बड़ी
शराफ़त
से
देखता
हूँ
मैं
उसकी
जानिब
बड़ी
तबीअत
से
देखता
हूँ
वो
जाते
जाते
मुझे
पलट
कर
के
देखता
तो
ये
देख
लेता
कि
मैं
मोहब्बत
से
देखता
हूँ
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Ankit Yadav
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जानता
हूँ
शहर
की
आब-ओ-हवा
को
जो
यहाँ
आया
कभी
सोता
नहीं
है
इसलिए
भी
ख़्वाहिशें
करता
नहीं
मैं
सोच
लूँ
जो
वो
कभी
होता
नहीं
है
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Ankit Yadav
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इन
हवाओं
के
ग़ुबारों
से
निकल
कर
आए
फिर
कोई
रश्क
सितारों
से
निकल
कर
आए
फिर
किसी
को
हो
तबीअत
से
तमन्ना
मेरी
फिर
कोई
रम्ज़
बहारों
से
निकल
कर
आए
मेरी
इक
चुप
ने
यूँँ
आवाज़
लगाई
उसको
वो
अगर
है
तो
क़तारों
से
निकल
कर
आए
हम
कहीं
तुम
थे
कहीं
और
हवा
थी
गुम-सुम
और
कुछ
रंग
दरारों
से
निकल
कर
आए
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Ankit Yadav
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क्या
लगता
है
जब
चलता
है
वो
तो
यार
ग़ज़ब
चलता
है
बाहर
पता
नहीं
लगता
पर
दिल
के
अंदर
सब
चलता
है
इन
काँधों
पर
सर
रखता
है
सो
लेता
है
तब
चलता
है
उन
होंटों
की
प्यास
बुझाने
दरिया
बेमतलब
चलता
है
तब
कहता
था
अब
नईं
चलता
अब
कहता
है
अब
चलता
है
हाथी
घोड़ा
राजा
प्यादा
जितनी
चालें
सब
चलता
है
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Ankit Yadav
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ये
तेज़
कार
मिरी
जान
गर
इजाज़त
दो
तो
सिर्फ़
सौ
नहीं
दो
सौ
के
पार
जाएगी
Ankit Yadav
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