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Ankit Yadav
in hawaon ke ghubaron se nikal kar aa.e
in hawaon ke ghubaron se nikal kar aa.e | इन हवाओं के ग़ुबारों से निकल कर आए
- Ankit Yadav
इन
हवाओं
के
ग़ुबारों
से
निकल
कर
आए
फिर
कोई
रश्क
सितारों
से
निकल
कर
आए
फिर
किसी
को
हो
तबीअत
से
तमन्ना
मेरी
फिर
कोई
रम्ज़
बहारों
से
निकल
कर
आए
मेरी
इक
चुप
ने
यूँँ
आवाज़
लगाई
उसको
वो
अगर
है
तो
क़तारों
से
निकल
कर
आए
हम
कहीं
तुम
थे
कहीं
और
हवा
थी
गुम-सुम
और
कुछ
रंग
दरारों
से
निकल
कर
आए
- Ankit Yadav
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क़र्ज़
की
पीते
थे
मय
लेकिन
समझते
थे
कि
हाँ
रंग
लावेगी
हमारी
फ़ाक़ा-मस्ती
एक
दिन
Mirza Ghalib
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अपने
जैसी
कोई
तस्वीर
बनानी
थी
मुझे
मिरे
अंदर
से
सभी
रंग
तुम्हारे
निकले
Salim Saleem
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रंग
बदला
यार
ने
वो
प्यार
की
बातें
गईं
वो
मुलाक़ातें
गईं
वो
चाँदनी
रातें
गईं
Hafeez Jalandhari
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अब
के
होली
पे
लगा
रंग
उतरता
ही
नहीं
किस
ने
इस
बार
हमें
रंग
लगाया
हुआ
है
Zia Zameer
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कितने
ही
लगे
रंग
ज़माने
में
सभी
पर
सब
रंग
छुपा
लेती
है
आकर
यहाँ
होली
Aves Sayyad
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आइने
में
देख
सकती
हो
अभी
रंग
मेरा
तुम
पे
अच्छा
लग
रहा
Neeraj Neer
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ग़ैर
से
खेली
है
होली
यार
ने
डाले
मुझ
पर
दीदा-ए-ख़ूँ-बार
रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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फिर
किसी
के
सामने
चश्म-ए-तमन्ना
झुक
गई
शौक़
की
शोख़ी
में
रंग-ए-एहतराम
आ
ही
गया
Asrar Ul Haq Majaz
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भुला
दो
रंग
नफ़रत
के
,
तिरंगा
हाथ
में
लेकर
दिखा
दो
तीन
रंगों
का
सभी
को
प्यार
होली
में
Vijay Anand Mahir
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ये
जो
इतने
रंग
बिखरे
हैं
ज़माने
में
मुस्कुरा
दो
तुम
अगर
सब
फ़ीके
हो
जाएँ
Intzar Akhtar
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बुला
के
मुझको
कहीं
एक
दिन
अकेले
में
वो
पूछती
है
हसीनों
के
ख़्वाब
क्यूँँ
तोड़े
महक
रहा
है
गुलाबों
से
आज
उसका
बदन
फिर
उसके
बाग़
से
कोई
गुलाब
क्यूँँ
तोड़े
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Ankit Yadav
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कमरे
की
दीवारें
बदला
करते
हैं
फ़ुर्सत
में
सरकारें
बदला
करते
हैं
हम
ऐसे
कुछ
दाढ़ी
वाले
लड़के
ही
फ़ैशन
की
रफ़्तारें
बदला
करते
हैं
स्याह
उबाऊ
काली
ठंडी
रातों
में
ये
सूरज
की
तारें
बदला
करते
हैं
दिल
के
अंदर
खाई
बढ़ती
जाती
है
और
वो
सिर्फ़
दरारें
बदला
करते
हैं
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Ankit Yadav
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साथ
में
एक
चाय
पीने
में
तू
बता
दे
कि
तेरा
क्या
जाए
Ankit Yadav
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नाम
का
वैसे
कोई
रिश्ता
नहीं
था
पर
हमारे
दरमियाँ
पर्दा
नहीं
था
उसकी
सोहबत
रास
आने
लग
गई
थी
दिल
तो
वैसे
भी
कहीं
लगना
नहीं
था
वो
मिरे
पहलू
में
आ
जाता
था
अक्सर
पर
न
जाने
क्यूँ
कभी
सोता
नहीं
था
जो
तिरी
दहलीज़
को
छू
कर
के
गुज़रा
फिर
किसी
दहलीज़
का
होता
नहीं
था
इक
ज़माना
लग
गया
ये
जानने
में
वो
पराया
था
मेरा
अपना
नहीं
था
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Ankit Yadav
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उसे
ये
ग़म
है
कि
मेरी
आँखें
उबर
गई
हैं
अब
उसके
ग़म
से
मुझे
ये
दुख
है
कि
उसका
चेहरा
अब
आइने
से
उतर
गया
है
Ankit Yadav
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