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Ankit Yadav
kamre ki deewarein badla karte hain
kamre ki deewarein badla karte hain | कमरे की दीवारें बदला करते हैं
- Ankit Yadav
कमरे
की
दीवारें
बदला
करते
हैं
फ़ुर्सत
में
सरकारें
बदला
करते
हैं
हम
ऐसे
कुछ
दाढ़ी
वाले
लड़के
ही
फ़ैशन
की
रफ़्तारें
बदला
करते
हैं
स्याह
उबाऊ
काली
ठंडी
रातों
में
ये
सूरज
की
तारें
बदला
करते
हैं
दिल
के
अंदर
खाई
बढ़ती
जाती
है
और
वो
सिर्फ़
दरारें
बदला
करते
हैं
- Ankit Yadav
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ज़रा
सा
वक़्त
जो
बदला
तो
हम
पे
हँसने
लगे
हमारे
काँधे
पे
सर
रख
के
रोने
वाले
लोग
Kashif Sayyed
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तुम
सेे
जो
मिला
हूँ
तो
मेरा
हाल
है
बदला
पतझड़
में
भी
जैसे
के
कोई
फूल
खिला
हो
Haider Khan
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आँधियों
से
लड़
रहे
हैं
जंग
कुछ
काग़ज़
के
लोग
हम
पे
लाज़िम
है
कि
इन
लोगों
को
फ़ौलादी
कहें
Ameer Imam
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मजबूरी
में
रक़ीब
ही
बनना
पड़ा
मुझे
महबूब
रहके
मेरी
जो
इज़्ज़त
नहीं
हुई
Sabahat Urooj
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इस
आ
समाँ
को
मुझ
सेे
है
क्या
दुश्मनी
"अली"?
भेजूं
अगर
दु'आ
भी
तो
सर
पर
लगे
मुझे
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Ali Rumi
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दुश्मनी
जम
कर
करो
लेकिन
ये
गुंजाइश
रहे
जब
कभी
हम
दोस्त
हो
जाएँ
तो
शर्मिंदा
न
हों
Bashir Badr
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कच्चा
सा
घर
और
उस
पर
जोरों
की
बरसात
है
ये
तो
कोई
खानदानी
दुश्मनी
की
बात
है
Saahir
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इस
तरह
ज़िंदगी
ने
दिया
है
हमारा
साथ
जैसे
कोई
निबाह
रहा
हो
रक़ीब
से
Sahir Ludhianvi
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अगर
रक़ीब
न
होते
तो
दोस्त
होते
आप
हमारे
शौक़,
ख़यालात
एक
जैसे
हैं
Amulya Mishra
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जंग
अपनों
के
बीच
जारी
है
सबके
हाथों
में
इक
कटारी
है
छत
हो
दीवार
हो
कि
दरवाज़ा
सबकी
अपनी
ही
ज़िम्मेदारी
है
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Santosh S Singh
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मोहब्बत
में
महारत
है
हमें
बस
की
नहीं
है
हसीं
चेहरा
खुली
ज़ुल्फ़ें
लटें
बस
की
नहीं
है
अभी
करनी
है
तो
कर
ले
मोहब्बत
कम
या
ज़्यादा
मुझे
मालूम
है
तू
बाद
में
बस
की
नहीं
है
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Ankit Yadav
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एक
शनासा
छूट
रहा
है
यार
असासा
छूट
रहा
है
हासिल
है
वो
ज़रा
ज़रा
सा
और
ज़रा
सा
छूट
रहा
है
चख
ली
है
होंठों
की
मिसरी
सिर्फ़
बतासा
छूट
रहा
है
सहराओं
में
बारिश
हुई
है
जंगल
प्यासा
छूट
रहा
है
मेरे
अंदर
तेरा
हिस्सा
अच्छा
ख़ासा
छूट
रहा
है
तुम
भी
कुछ
तो
सोचो
अंकित
हाथ
से
कासा
छूट
रहा
है
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Ankit Yadav
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ये
तेज़
कार
मिरी
जान
गर
इजाज़त
दो
तो
सिर्फ़
सौ
नहीं
दो
सौ
के
पार
जाएगी
Ankit Yadav
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तुम्हारे
शहर
के
गरजे
हुए
थे
हमारे
गाँव
में
बरसे
हुए
थे
तेरे
बादल
से
उम्मीदें
थीं
लेकिन
हमारे
खेत
भी
तरसे
हुए
थे
न
फिर
ख़ुद
को
कभी
सुलझा
सके
वो
जो
तेरी
ज़ुल्फ़
से
उलझे
हुए
थे
सुना
है
अब
वो
बेटी
चाहती
है
वो
जिसकी
कोख
से
बेटे
हुए
थे
वो
चेहरा
अब
भी
याद
आता
है
'अंकित'
वो
जिसको
देख
कर
अंधे
हुए
थे
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Ankit Yadav
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उसे
ये
ग़म
है
कि
मेरी
आँखें
उबर
गई
हैं
अब
उसके
ग़म
से
मुझे
ये
दुख
है
कि
उसका
चेहरा
अब
आइने
से
उतर
गया
है
Ankit Yadav
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