nazm fareb aur main | नज़्म: फ़रेब और मैं

  - Ankit Yadav
नज़्म:फ़रेबऔरमैं
मुझेकभीमिलोतोमेरीबातपेयक़ीं
नहींकरोतोकोईग़मनहीं
मिरीतोउम्रहीफ़रेबऔरझूठमेंकटी
वहीसभीमेंहैबटी
यहीतोबातहैबड़ेकमालकी
किमैंनेयेहुनरसमंदरोंसेसीखकर
दिखादियाहैआज़माकेहररक़ीबपर
मिरायक़ींकरोफ़रेबऔरधूल
आँखमेंअगरपड़ेतोचुभतेहैं
वोआँखसेचमकचुराकेछोड़देतेहैं
वोरस्तामोड़देतेहैं
दिलोंकोतोड़देतेहैं
मैंक्याकरूँँपलाहूँमैं
किसीउजाड़पेड़कीतपीहुईसीछाँवमें
किसीउजाड़गाँवमें
वोपेड़औरगाँवजोकिमरगएथे
एकबूँदनीरकीतलाशमें
तुम्हारेजैसेहीकिसीहसीनरहनुमाकीआसमें
औरबतागएमुझेकि
अपनीज़िंदगीइसतरहतबाहकर
फ़रेबकरकेभीअगरनिबाहकरसके
तोफिरनिबाहकर
मैंमुद्दतोंसेभूखकोज़ेहनमें
लिएहुएतमामभेड़ियोंसेदूरभागतारहा
तमामरातज़ख़्मकोछुपाएजागतारहा
वोभेड़िएजोजिस्मनोचखागए
भूखफिरभीमिटीतोहड्डियाँचबागए
उन्हींसेसीखकरकेजिस्मनोचनेकाहुनर
मैंबसफ़रेबऔरफ़रेबबनकेरहगया
  - Ankit Yadav
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