b-rang-e-khwaab main bikhra rahoonga | ब-रंग-ए-ख़्वाब मैं बिखरा रहूँगा

  - Akram Naqqash
ब-रंग-ए-ख़्वाबमैंबिखरारहूँगा
तिरेइंकारजबचुनतारहूँगा
कभीसोचानहींथामैंतिरेबिन
यूँँज़ेर-ए-आसमाँतन्हारहूँगा
तूकोईअक्समुझमेंढूँडनामत
मैंशीशाहूँफ़क़तशीशारहूँगा
ताअफ़्फ़ुन-ज़ारहोतीमहफ़िलोंमें
ख़याल-ए-यारसेमहकारहूँगा
जि
यूँँगामैंतिरीसाँसोंमेंजबतक
ख़ुदअपनीसाँसमेंज़िंदारहूँगा
गलीबाज़ारबढ़तीवहशतोंको
मैंतेरेनामहीलिखतारहूँगा
  - Akram Naqqash
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