kab tire zikr se dil shaad nahin | कब तिरे ज़िक्र से दिल शाद नहीं

  - Akmal Alduri
कबतिरेज़िक्रसेदिलशादनहीं
कबमिरेलबपेतिरीयादनहीं
पूछिएमुझसेहाल-ए-माज़ी
क्यासुनाऊँमुझेकुछयादनहीं
वोनिगाहोंकातसादुमसर-ए-राह
मुझकोहैयादतुझेयादनहीं
इश्क़औरहुस्नहदोंमेंअपने
दोनोंपाबंदहैंआज़ादनहीं
जिससेज़ाहिरहोंजज़्बात-ए-दिल
शे'रवोमुस्तहिक़-ए-दादनहीं
इस्तक़ामतनहींजिसकोहासिल
वोतोधोकाहैतिरीयादनहीं
गुलशन-ए-इल्म-ओ-अदबमें'अकमल'
हज़रत-ए-‘क़द्र’साउस्तादनहीं
  - Akmal Alduri
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