bharosa phoolon ka kaanton ka e'tibaar nahin | भरोसा फूलों का काँटों का ए'तिबार नहीं

  - Akmal Alduri
भरोसाफूलोंकाकाँटोंकाए'तिबारनहीं
तअ'य्युनातकेख़ाकेहैंयेबहारनहीं
मैंकैसेआपकेवा'देकाए'तिबारकरूँँ
हुज़ूरजबमुझेख़ुदअपनाए'तिबारनहीं
मिरेशुऊर-ए-मोहब्बतकीजिससेज़िल्लतहो
ख़ुदाकेफ़ज़्लसेऐसामिराशिआ'रनहीं
वोबुत-कदाहोकिकाबाहोयाकिमय-ख़ाना
किसीजगहभीमोहब्बतसेमुझकोआरनहीं
उठानीपड़तीहैज़िल्लतक़दमक़दमपेउसे
जहाँमेंजिसकासदाक़तअगरशिआ'रनहीं
वोफूलख़ारहैजोगिरगयानज़रसेतिरी
वोख़ारगुलहैजोनज़रोंमेंतेरीख़ारनहीं
किसीकीसाक़ीकेक़दमोंपेहैजबीन-ए-नियाज़
किसीकोसाक़ीपेख़ुदअपनेए'तिबारनहीं
तूअपनीआँखोंसेसाक़ीपिलाकेबे-ख़ुदकर
पि
यूँँमैंजामसेऐसातोबादा-ख़्वारनहीं
गुनाहगारोंपेहैजबकिरहमतोंकानुज़ूल
कहूँमैंकैसेफिर'अकमल'गुनाहगारनहीं
  - Akmal Alduri
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