jo qais ka tha kahii miraa bhi vo haal na ho | जो क़ैस का था कहीं मेरा भी वो हाल न हो

  - Akhil Saxena
जोक़ैसकाथाकहींमेराभीवोहालहो
इलाज-ए-हिज्रसेबेहतरतोहैविसालहो
कोईगुरेज़नहींउसकोमेरीख़ुद-कुशीसे
हैशर्तआख़िरीमेंउसकाफ़ोनकॉलहो
कहानीमेंमिराकिरदारफीकापड़गयाथा
सोअगलेयारकीसूरतपरीजमालहो
मैंआँखसीकेतिरेख़्वाबदेखनेलगाहूँ
किनींदटूटनेकाकोईभीसवालहो
तूमझसेदूररहेऔरयेभीमुमकिनहो
किसीभीएकग़ज़लमेंतिराख़यालहो
येकंगनआजभलेलौटादोध्यानरहे
पराईसम्तजोखनकेतुम्हेंमलालहो
  - Akhil Saxena
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