samaan sad hazaar hain tu jaag to sahi | सामान सद हज़ार हैं तू जाग तो सही

  - Akhtar Ziai
सामानसदहज़ारहैंतूजागतोसही
सबवक़्फ़-ए-इंतिज़ारहैंतूजागतोसही
ग़ाफ़िलनज़रउठाकिवोआसार-ए-सुब्ह-ए-नौ
गर्दूंपेआश्कारहैंतूजागतोसही
औक़ाततेरीक़ुव्वत-ए-बाज़ूपेमुनहसिर
लम्हातसाज़गारहैंतूजागतोसही
तेरायक़ीनतेराअमलतेरेवलवले
हस्तीकाए'तिबारहैंतूजागतोसही
महव-ए-ख़्वाबदीदा-ए-बीनाकेवास्ते
ख़ुदजल्वेबे-क़रारहैंतूजागतोसही
बे-बर्गबे-लिबासदरख़्तोंकीटहनियाँ
पैग़ाम-ए-नौ-बहारहैंतूजागतोसही
'अख़्तर'-ज़ियाई'नींदकेमातोंकेशहरमें
कुछलोगहोशियारहैंतूजागतोसही
  - Akhtar Ziai
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