subh-e-nau koi dam men jagmagane waali hai | सुब्ह-ए-नौ कोई दम में जगमगाने वाली है

  - Akhtar Wajidi
सुब्ह-ए-नौकोईदममेंजगमगानेवालीहै
रातसेघबराओरातजानेवालीहै
बाग़बाँकेतेवरसेझाँकतेहैंअंदेशे
फ़स्ल-ए-गुलजानेक्यागुलखिलानेवालीहै
कितनेहादसोंकोहमकरचुकेहैंशर्मिंदा
ज़िंदगीहमेंकबतकआज़मानेवालीहै
ज़िंदगीकोनफ़रतकाज़हरक्यूँपिलातेहो
ज़िंदगीमोहब्बतकेगीतगानेवालीहै
उनकीचश्म-ए-मस्त'अख़्तर'तिश्नगान-ए-उल्फ़तको
मस्तकरनेवालीहैरसपिलानेवालीहै
  - Akhtar Wajidi
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