manzar-e-shaam-e-alam bhi nahin dekhe jaate | मंज़र-ए-शाम-ए-अलम भी नहीं देखे जाते

  - Akhtar Wajidi
मंज़र-ए-शाम-ए-अलमभीनहींदेखेजाते
क्यासितमहैकिसितमभीनहींदेखेजाते
अहल-ए-ग़मअपनीतबीअ'तसेहैंमजबूरबहुत
तेरेअंदाज़-ए-करमभीनहींदेखेजाते
इतनीउजलतसेजबींझुकतीहैसज्देकेलिए
आँखसेनक़्श-ए-क़दमभीनहींदेखेजाते
कम-निगाहीभीमुसीबतहैशरीफ़ोंकेलिए
बंदमुट्ठीकेभरमभीनहींदेखेजाते
तब्सिराकरतेहैंक्यूँलोगमिरीहालतपर
जानेक्यूँउनकेकरमभीनहींदेखेजाते
उनकीमंज़िलकीतरफ़बढ़तेहैंजिसदम'अख़्तर'
राहमेंदैर-ओ-हरमभीनहींदेखेजाते
  - Akhtar Wajidi
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