larz utha hai mire dil men kyun na jaane diya | लरज़ उठा है मिरे दिल में क्यूँँ न जाने दिया

  - Akhtar Shumar
लरज़उठाहैमिरेदिलमेंक्यूँँजानेदिया
तिरापयामतोख़ामोशसीहवानेदिया
जलारहाथामुझेमैंनेभीजलानेदिया
उजालाउसनेदियाभीतोकिसबहानेदिया
अभीकुछऔरठहरजातामेरेकहनेपर
वोजानेवालाथाख़ुदहीसोमैंनेजानेदिया
वोअपनीसैरकेक़िस्सेमुझेसुनातारहा
मुझेतोहाल-ए-दिलउसनेकहाँसुनानेदिया
मैंशुक्रउसकाकैसेअदाकरूँँजानाँ
शुऊ'रमुझकोमोहब्बतकाजिसख़ुदानेदिया
करमकेपलमेंयेरौशनहुआब-हम्दिल्लाह
नहींबुझेगामिरातुझसेज़मानेदिया
'शुमार'सामनेउसकेभीगुफ़्तुगूकेवक़्त
जोरंगचेहरेपेआयाथामैंनेआनेदिया
  - Akhtar Shumar
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy