us mah-jabeen se aaj mulaqaat ho gaii | उस मह-जबीं से आज मुलाक़ात हो गई

  - Akhtar Shirani
उसमह-जबींसेआजमुलाक़ातहोगई
बेदर्दआसमानयेक्याबातहोगई
आवारगान-ए-इश्क़कामस्कनपूछिए
पड़रहतेहैंवहींपेजहाँरातहोगई
ज़िक्र-ए-शब-ए-विसालहोक्याक़िस्सामुख़्तसर
जिसबातसेवोडरतेथेवोबातहोगई
मस्जिदकोहमचलेगएमस्तीमेंभूलकर
हमसेख़तायेपीर-ए-ख़राबातहोगई
पिछलेग़मोंकाज़िक्रहीक्याजबवोमिलगए
आसमाँतलाफ़ी-ए-माफ़ातहोगई
ज़ाहिदकोज़िंदगीहीमेंकौसरचखादिया
रिंदोंसेआजयेभीकरामातहोगई
बेचैनरखनेवालेपरेशाँहोंख़ुदक्यूँँ
आख़िरकोतेरीज़ुल्फ़मिरीरातहोगई
झूलाझुलाएँचलकेहसीनोंकोबाग़में
गुजरातमेंसुनाहैकिबरसातहोगई
क्याफ़ाएदाअब'अख़्तर'अगरपारसाबने
जबसारीउम्रनज़्र-ए-ख़राबातहोगई
  - Akhtar Shirani
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