निगाहेंमुंतज़िरहैंकिसकीदिलकोजुस्तुजूक्याहै
मुझेख़ुदभीनहींमालूममेरीआरज़ूक्याहै
बदलतीजारहीहैकरवटोंपरकरवटेंदुनिया
किसीसूरतनहींखुलताजहान-ए-रंग-ओ-बूक्याहै
येसोचादिलकोनज़्र-ए-आरज़ूकरतेहुएहमने
निगाह-ए-हुस्न-ए-ख़ुद-आरामेंदिलकीआबरूक्याहै
मुझेअबदेखतीहैज़िंदगीयूँँबे-नियाज़ाना
किजैसेपूछतीहोकौनहोतुमजुस्तुजूक्याहै
हुआकरतीहैदिलसेगुफ़्तुगूबे-ख़्वाबरातोंमें
मगरखुलतानहींमुझपरकि'अख़्तर'गुफ़्तुगूक्याहै
मैंइनआँखोंकोक्यासमझूँकिअपनीख़ाना-वीरानी
जिन्हेंयेभीनहींमालूमख़ून-ए-आरज़ूक्याहै
किरनसूरजकीकहतीहैफिरआएगीशब-ए-हिज्राँ
सहरहोतीहै'अख़्तर'सोरहोयेहाव-हूक्याहै