yaqeen hai na gumaan hai zaraa sambhal ke chalo | यक़ीन है न गुमाँ है ज़रा सँभल के चलो

  - Akhtar Saeed Khan
यक़ीनहैगुमाँहैज़रासँभलकेचलो
अजीबरंग-ए-जहाँहैज़रासँभलकेचलो
सुलगतेख़्वाबोंकीबस्तीहैरह-गुज़ार-ए-हयात
यहाँधुआँहीधुआँहैज़रासँभलकेचलो
रविशरविशहैगुज़र-गाह-ए-निकहत-ए-बर्बाद
कलीकलीनिगराँहैज़रासँभलकेचलो
जोज़ख़्मदेकेगईहैअभीनसीम-ए-सहर
सुकूत-ए-गुलसेअयाँहैज़रासँभलकेचलो
ख़िराम-ए-नाज़मुबारकतुम्हेंमगरयेदिल
मता-ए-शीशा-गराँहैज़रासँभलकेचलो
सुराग़-ए-हश्रपाजाएँदेखनेवाले
हुजूम-ए-दीदा-वराँहैज़रासँभलकेचलो
यहाँज़मीनभीक़दमोंकेसाथचलतीहै
येआलम-ए-गुज़राँहैज़रासँभलकेचलो
  - Akhtar Saeed Khan
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