ik kiran mehr ki zulmaat pe bhari hogii | इक किरन मेहर की ज़ुल्मात पे भारी होगी

  - Akhtar Saeed Khan
इककिरनमेहरकीज़ुल्मातपेभारीहोगी
रातउनकीहैमगरसुब्हहमारीहोगी
हम-सफ़ीरान-ए-चमनमिलकेपुकारेंतोज़रा
यहींख़्वाबीदाकहींबाद-ए-बहारीहोगी
इसतरफ़भीकोईख़ुश्बूसेमहकताझोंका
सबातूनेतोवोज़ुल्फ़सँवारीहोगी
येजोमिलतीहैतिरेग़मसेग़म-ए-दहरकीशक्ल
दिलनेतस्वीरसेतस्वीरउतारीहोगी
बू-ए-गुलआतीहैमिट्टीसेचमनकीजबतक
हमपेदहशतख़िज़ाँकीकभीतारीहोगी
  - Akhtar Saeed Khan
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