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Parwez Akhtar
us shakhs ki bas ek baat achchhii hai
us shakhs ki bas ek baat achchhii hai | उस शख़्स की बस एक बात अच्छी है
- Parwez Akhtar
उस
शख़्स
की
बस
एक
बात
अच्छी
है
कोई
भी
वक़्त
हो
याद
बहुत
आता
है
हम
टूट
ही
गए
होते
अगर
नहीं
रोते
अच्छा
है,
ग़म
कोई
काम
तो
आता
है
- Parwez Akhtar
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तू
है
सूरज
तुझे
मालूम
कहाँ
रात
का
दुख
तू
किसी
रोज़
मेरे
घर
में
उतर
शाम
के
बाद
Farhat Abbas Shah
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मैं
शा'इर
हूँ
मोहब्बत
का
मिरे
दुख
भी
रसीले
हैं
Farhat Abbas Shah
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जौन
तुम्हें
ये
दौर
मुबारक,
दूर
ग़म-ए-अय्याम
से
हो
एक
पागल
लड़की
को
भुला
कर
अब
तो
बड़े
आराम
से
हो
Jaun Elia
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दिल
ना-उमीद
तो
नहीं
नाकाम
ही
तो
है
लंबी
है
ग़म
की
शाम
मगर
शाम
ही
तो
है
Faiz Ahmad Faiz
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ज़िंदगी
क्या
किसी
मुफ़लिस
की
क़बा
है
जिस
में
हर
घड़ी
दर्द
के
पैवंद
लगे
जाते
हैं
Faiz Ahmad Faiz
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
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Santosh S Singh
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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ये
ग़म
हमको
पत्थर
कर
देगा
इक
दिन
कोई
आ
कर
हमें
रुलाओ
पहले
तो
Siddharth Saaz
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मुझे
छोड़
दे
मेरे
हाल
पर
तिरा
क्या
भरोसा
है
चारा-गर
ये
तिरी
नवाज़िश-ए-मुख़्तसर
मेरा
दर्द
और
बढ़ा
न
दे
Shakeel Badayuni
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हमको
नहीं
है
कुछ
भी
ख़बर
फिर
भी
हाँ
मगर
तेरे
बगैर
जीना
का
सोचा,
तो
रो
दिए
पूछा
जो
उसने
रोते
हो
'अख़्तर'
भला
तुम
क्यूँँं
अब
बात
आई
रोने
की,
सोचा,
तो
रो
दिए
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Parwez Akhtar
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ख़्याल-ए-हिज्र
से
डर
जाते
हैं
हम
अक्सर
और
घबरा
के
तेरे
लब
को
चूम
लेते
हैं
Parwez Akhtar
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अपने
दर्द
पर
उस
को
हंसता
देखना
है
चले
जितने
भी
दिन
अब
ये
तमाशा
देखना
है
कि
उसका
अक्स
अब
आँखों
में
समा
जाए
ऐसे
कि
उसको
आज
मुझे
इतना
ज़ियादा
देखना
है
अब
'अख़्तर'
का
क़त्ल
उसकी
रज़ा
से
होगा
तो
फिर
आज
मुझे
उसका
इरादा
देखना
है
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Parwez Akhtar
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दीदार
हुआ
उनका
इक
मुद्दत
बाद
उन्हें
हम
देख
के
बच्चों
सा
मुस्कुराने
लगे
Parwez Akhtar
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तू
मुझे
फिर
ढूंढता
रह
जाएगा
बिनई
लिए
और
इधर
ज़िन्दगी
के
साथ
हो
जाऊंगा
मैं
Parwez Akhtar
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