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Parwez Akhtar
ek baar basa len agar kuchh apne dil men
ek baar basa len agar kuchh apne dil men | एक बार बसा लें अगर कुछ अपने दिल में
- Parwez Akhtar
एक
बार
बसा
लें
अगर
कुछ
अपने
दिल
में
फिर
दर्द
हो
या
तू
हो
निकलने
नहीं
देंगे
- Parwez Akhtar
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ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
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Santosh S Singh
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ज़ख़्म
कहते
हैं
दिल
का
गहना
है
दर्द
दिल
का
लिबास
होता
है
Gulzar
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तुम्हारे
बाद
ये
दुख
भी
तो
सहना
पड़
रहा
है
किसी
के
साथ
मजबूरी
में
रहना
पड़
रहा
है
Ali Zaryoun
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दर्द
ऐसा
नजरअंदाज
नहीं
कर
सकते
जब्त
ऐसा
की
हम
आवाज
नहीं
कर
सकते
बात
तो
तब
थी
कि
तू
छोड़
के
जाता
ही
नहीं
अब
तेरे
मिलने
पे
हम
नाज
नहीं
कर
सकते
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Ismail Raaz
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हमारी
उम्र
के
लड़के
ग़ज़ल
तो
लिख
रहे
हैं
पर
ये
इतना
दर्द
लेके
जी
रहे
हैं
ठीक
थोड़ी
है
Ramesh Singh
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कब
ठहरेगा
दर्द
ऐ
दिल
कब
रात
बसर
होगी
सुनते
थे
वो
आएँगे
सुनते
थे
सहर
होगी
Faiz Ahmad Faiz
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तेरी
आँखों
में
जो
इक
क़तरा
छुपा
है,
मैं
हूँ
जिसने
छुप
छुप
के
तेरा
दर्द
सहा
है,
मैं
हूँ
एक
पत्थर
कि
जिसे
आँच
न
आई,
तू
है
एक
आईना
कि
जो
टूट
चुका
है,
मैं
हूँ
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Fauziya Rabab
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इस
क़दर
जज़्ब
हो
गए
दोनों
दर्द
खेंचूँ
तो
दिल
निकल
आए
Abbas Qamar
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किस
ने
हमारे
शहर
पे
मारी
है
रौशनी
हर
इक
मकाँ
के
ज़ख़्म
से
जारी
है
रौशनी
Nomaan Shauque
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कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
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Faiz Ahmad
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देखिए
दोस्ती
मेरी
अच्छी
नहीं
आपका
सब
कुछ
तबाह
हो
जाएगा
Parwez Akhtar
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तू
मुझे
फिर
ढूंढता
रह
जाएगा
बिनई
लिए
और
इधर
ज़िन्दगी
के
साथ
हो
जाऊंगा
मैं
Parwez Akhtar
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मैं
चाहता
हूँ
वो
मुझ
से
दूर
रहे
और
वो
नासमझ
है
फिर
दिल
लगा
के
मानेगी
Parwez Akhtar
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मिला
है
क़ैस
मुझे
दश्त
में
तो
पूछता
है
तुझे
भी
दश्त
में
लाई
है
जुस्तजू
तेरी?
Parwez Akhtar
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जब
कभी
नींद
हमें
वक़्त
पे
आने
लगे
है
तो
डर
के
तेरी
याद
को
आवाज़
लगा
देते
हैं
Parwez Akhtar
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