haal-e-dil bhi suna ke kya hogaa | हाल-ए-दिल भी सुना के क्या होगा

  - Akhtar Madhupuri
हाल-ए-दिलभीसुनाकेक्याहोगा
बे-वफ़ाकैसेबा-वफ़ाहोगा
दर्दहदसेअगरसिवाहोगा
जानजाएगीऔरक्याहोगा
ना-तवानोंपेसौतरहकेसितम
सोचअंजाम-ए-ज़ुल्मक्याहोगा
जानदेदेंगेराह-ए-उल्फ़तमें
यूँँमोहब्बतकाहक़अदाहोगा
हमतोजौर-ओ-जफ़ाकेख़ूगरहैं
आपसेइसकाक्यागिलाहोगा
सूद-दर-सूदबढ़ताजाताहै
क़र्ज़मुश्किलसेअबअदाहोगा
रौशनीआजइतनीतेज़हैक्यूँ
होहोमेराघरजलाहोगा
तीरगीपरहुआतो'अख़्तर'
रौशनीपरभीतब्सिराहोगा
  - Akhtar Madhupuri
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