ashk jab deeda-e-tar se niklaa | अश्क जब दीदा-ए-तर से निकला

  - Akhtar Imam Rizvi
अश्कजबदीदा-ए-तरसेनिकला
एककाँटासाजिगरसेनिकला
फिरमैंरातगएतकलौटा
डूबतीशामजोघरसेनिकला
एकमय्यतकीतरहलगताथा
चाँदजबक़ैद-ए-सहरसनिकला
मुझकोमंज़िलभीपहचानसकी
मैंकिजबगर्द-ए-सफ़रसेनिकला
हाएदुनियानेउसेअश्ककहा
ख़ूनजोज़ख़्म-ए-नज़रसेनिकला
इकअमावसकानसीबाहूँमैं
आजयेचाँदकिधरसेनिकला
जबउड़ाजानिब-ए-मंज़िल'अख़्तर'
एकशो'लामिरेपरसेनिकला
  - Akhtar Imam Rizvi
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