tapish gulzaar tak pahunchee lahu deewaar tak aaya | तपिश गुलज़ार तक पहुँची लहू दीवार तक आया

  - Akhtar Husain Jafri
तपिशगुलज़ारतकपहुँचीलहूदीवारतकआया
चराग़-ए-ख़ुद-कलामीकाधुआँबाज़ारतकआया
हुआकाग़ज़मुसव्वरएकपैग़ाम-ए-ज़बानीसे
सुख़नतस्वीरतकपहुँचाहुनरपुरकारतकआया
अबसतारीकरस्तेकोतह-ए-ख़ुर्शीद-ए-जाँरक्खा
यहीतार-ए-नफ़सआज़ारसेपैकारतकआया
मोहब्बतकाभँवरअपनाशिकायतकीजिहतअपनी
वोमेहवरदूसराथाजोमिरेपिंदारतकआया
अजबचेहरासफ़रकाथाहवसकेज़र्दपानीमें
क़दमदलदलसेनिकलातोख़त-ए-रफ़्तारतकआया
फिरइसकेबादतम्बूरअलमना-मो'तबरठहरे
कोईक़ासिदइसशाम-ए-शिकस्त-आसारतकआया
  - Akhtar Husain Jafri
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy