shaam tanhaaii dhuaan uthata barabar dekhte | शाम तन्हाई धुआँ उठता बराबर देखते

  - Akhtar Hoshiyarpuri
शामतन्हाईधुआँउठताबराबरदेखते
फिरसर-ए-शबचाँदउभरनेकाभीमंज़रदेखते
जुम्बिश-ए-लबमेंमिरीआवाज़कीतस्वीरहै
काशवोभीबोलतेलफ़्ज़ोंकेपैकरदेखते
साहिलोंपरसीपियाँथींऔरहवाकाशोरथा
पानियोंमेंडूबतेतोकोईगौहरदेखते
खिड़कियोंकीओटसेअंदाज़ाहोसकतानहीं
शहरकाअहवालतुमघरसेनिकलकरदेखते
आनेवालोंकेलिएदरवाज़ेरहतेहैंखुले
जानेवालेभीकभीमुड़करसू-ए-दरदेखते
बारिशोंमेंभीगनाजिस्मोंकाउजलाबाँकपन
रास्तोंकीगर्दभीयेलोगसरपरदेखते
वोजिन्हेंदस्तारकीहसरतरहीहैउम्रभर
मेरेशानोंपरकभी'अख़्तर'मिरासरदेखते
  - Akhtar Hoshiyarpuri
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