sochna chhod diya ham ne ki kal kya hogaa | सोचना छोड़ दिया हम ने कि कल क्या होगा

  - Akhtar Gwaliori
सोचनाछोड़दियाहमनेकिकलक्याहोगा
इससेबेहतरग़म-ए-दौराँतिराहलक्याहोगा
तुममुझेशहर-बदरकरतोरहेहोलेकिन
येभीसोचाहैकिअंजाम-ए-ग़ज़लक्याहोगा
मैंतोकरलूँब-खु़शीतुझकोगवारालेकिन
ग़म-ए-तन्हाईतिरादर्द-ए-अमलक्याहोगा
जिसकीख़ुशबूसेमहकतेहैंदर-ओ-बाम-ए-हयात
कुछसहीमौसम-ए-गुलइसकाबदलक्याहोगा
जगमगाताहैजोहरज़र्रेकेदिलमेंअक्सर
हाएवोहुस्न-ए-सनमहुस्न-ए-अज़लक्याहोगा
ख़ुदमसीहाहैयहाँआह-ओ-फ़ुग़ाँमेंमसरूफ़
इससेऔरोंकीतकालीफ़काहलक्याहोगा
गेसू-ए-वक़्तउलझतेहीचलेजातेहैं
हरबशरसोचमेंडूबाहैकिकलक्याहोगा
मेरेभूलनेवालेकभीयेभीसोचा
जगमगाउट्ठेजोयादोंकेकँवलक्याहोगा
हर-नफ़सदारकीमानिंदलगेहै'अख़्तर'
ज़िंदगीयेहैतोफिररंग-ए-अजलक्याहोगा
  - Akhtar Gwaliori
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