chaaho to mira dukh mira aazaar na samjho | चाहो तो मिरा दुख मिरा आज़ार न समझो

  - Akhtar Bastavi
चाहोतोमिरादुखमिराआज़ारसमझो
लेकिनमिरेख़्वाबोंकोगुनहगारसमझो
आसाँनहींइंसाफ़कीज़ंजीरहिलाना
दुनियाकोजहाँगीरकादरबारसमझो
आँगनकेसुकूँकीकोईक़ीमतनहींहोती
कहतेहोजिसेघरउसेबाज़ारसमझो
उजड़ेहुएताक़ोंपेजमीगर्दकीतहमें
रू-पोशहैंकिसक़िस्मकेअसरारसमझो
एहसासकेसौज़ख़्मबचासकतेहो'अख़्तर'
इज़हार-ए-मुरव्वतकोअगरप्यारसमझो
  - Akhtar Bastavi
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