koi maal-e-mohabbat mujhe batao nahin | कोई मआल-ए-मोहब्बत मुझे बताओ नहीं

  - Akhtar Ansari
कोईमआल-ए-मोहब्बतमुझेबताओनहीं
मैंख़्वाबदेखरहाहूँमुझेजगाओनहीं
किसीकीयादहैउनकीमहकसेवाबस्ता
मुझेयेफूलख़ुदाकेलिएसुँघाओनहीं
मोहब्बतऔरजवानीकेतज़्किरेकरो
किसीसताएहुएकोबहुतसताओनहीं
येकहरहाहैमोहब्बतकीकाविशोंसेदिल
येमेरेहँसनेकेदिनहैंमुझेरुलाओनहीं
उजड़केफिरनहींबस्ताजहान-ए-दिल'अख़्तर'
बहार-ए-बाग़कोइसपरदलीललाओनहीं
  - Akhtar Ansari
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