har vaqt nauha-khwaan si rahtii hain meri aañkhen | हर वक़्त नौहा-ख़्वाँ सी रहती हैं मेरी आँखें

  - Akhtar Ansari
हरवक़्तनौहा-ख़्वाँसीरहतीहैंमेरीआँखें
इकदुखभरीकहानीकहतीहैंमेरीआँखें
जज़्बात-ए-दिलकीशिद्दतसहतीहैंमेरीआँखें
गुल-रंगऔरशफ़क़-गूँरहतीहैंमेरीआँखें
ऐशतरबकेजलसेदर्दअलमकेमंज़र
क्याकुछहमनेदेखाकहतीहैंमेरीआँखें
जबसेदिलजिगरकीहमदर्दबनगईहैं
ग़मगीनियोंमेंडूबीरहतीहैंमेरीआँखें
लबरेज़होकेदिलकासाग़रछलकउठाहै
शायदइसीसबबसेबहतीहैंमेरीआँखें
हरजुम्बिश-ए-नज़रहैरूदाद-ए-इश्क़'अख़्तर'
हैंबे-ज़बाँमगरकुछकहतीहैंमेरीआँखें
  - Akhtar Ansari
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