pur-kaif ziyaayein hoti hain pur-noor ujaale hote hain | पुर-कैफ़ ज़ियाएँ होती हैं पुर-नूर उजाले होते हैं

  - Akhtar Ansari
पुर-कैफ़ज़ियाएँहोतीहैंपुर-नूरउजालेहोतेहैं
जबख़ाक-बसरदिलहोताहैऔरअर्शपेनालेहोतेहैं
हँसतेहैंदहान-ए-ज़ख़्मसेहमगातेहैंफ़ुग़ाँकेबरबतपर
आशुफ़्ता-सरोंकीदुनियाकेसबढंगनिरालेहोतेहैं
क्याक़हरबरसताहैदिलपरसावनकीशबोंमेंक्याकहिए
कुछदर्दकीफुवारेंहोतीहैंकुछयासकेझालेहोतेहैं
इनउजड़ेहुएअरमानोंकोकिसशौक़सेदिलनेसींचाथा
बर्बादमगरहोतेहैंवहीजोनामकेपालेहोतेहैं
चाहतकेसितमबर्दाश्तकरेंमरमरकेजिएँऔरमरसकें
क्याजानिएकिसमिट्टीकेबनेयेचाहनेवालेहोतेहैं
दिलतंगहोरह-रव-ए-ग़मकाँटोंकेलिएतोकमसेकम
मानिंद-ए-नवेद-ए-अब्र-ए-करमयेपाँवकेछालेहोतेहैं
उफ़-रेवोनज़ाकतलहजेकीबातेंजोनिकलतीहैंमुँहसे
याचाँदकीकिरनेंहोतीहैंयाबर्फ़केगालेहोतेहैं
येदर्द-ए-जुनूँयेसोज़-ए-जिगरइनकैफ़ियतोंकेगिर्द'अख़्तर'
तस्ख़ीरकेहल्क़ेहोंकिहोंतक़्दीसकेहालेहोतेहैं
  - Akhtar Ansari
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