mohabbat karne waalon ke bahaar-afroz seenon men | मोहब्बत करने वालों के बहार-अफ़रोज़ सीनों में

  - Akhtar Ansari
मोहब्बतकरनेवालोंकेबहार-अफ़रोज़सीनोंमें
रहाकरतीहैशादाबीख़िज़ाँकेभीमहीनोंमें
ज़िया-ए-मेहरआँखोंमेंहैतौबामह-जबीनोंके
किफ़ितरतनेभराहैहुस्नख़ुदअपनाहसीनोंमें
हवा-ए-तुंदहैगिर्दाबहैपुर-शोरधाराहै
लिएजातेहैंज़ौक-ए-आफ़ियतसीशयसफ़ीनोंमें
मैंहँसताहूँमगरदोस्तअक्सरहँसतेहुएभी
छुपाएहोतेहैंदाग़औरनासूरअपनेसीनोंमें
मैंउनमेंहूँजोहोकरआस्तान-ए-दोस्तसेमहरूम
लिएफिरतेहैंसज्दोंकीतड़पअपनीजबीनोंमें
मिरीग़ज़लेंपढ़ेंसबअहल-ए-दिलऔरमस्तहोजाएँ
मय-ए-जज़्बातलायाहूँमैंलफ़्ज़ीआबगीनोंमें
  - Akhtar Ansari
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