charkh ki sai-e-jafa koshish naakaara hai | चर्ख़ की सई-ए-जफ़ा कोशिश नाकारा है

  - Akhtar Ansari
चर्ख़कीसई-ए-जफ़ाकोशिशनाकाराहै
गर्दिश-ए-दहरयहाँजुम्बिश-ए-गहवाराहै
चाँदतारोंकेतलातुमसेयेआताहैख़याल
दिल-ए-वहशीकोईतूफ़ाँ-ज़दासय्याराहै
बहगएदीदा-ए-नम-नाकसेदरियालेकिन
दिलवहीएकदहकताहुआअँगाराहै
दिलहुआसोज़-ए-जहन्नममेंगिरफ़्तारमगर
रूहअबभीकिसीफ़िरदौसमेंआवाराहै
कैसीतक़दीरकीगर्दिशग़म-ए-दिलकोमैंने
गर्दिश-ए-गुम्बद-ए-अफ़्लाकपेदेमाराहै
मेरेशे'रोंसेतार्रुज़करनाक़िद-ए-फ़न
मेरीबर्बादी-ए-दिलहीमिराशह-पाराहै
बहजत-ए-फ़िक्रपेक़ादिरहूँमैंजबतक'अख़्तर'
मुझेसरमाया-ए-अंदोहबहुतप्याराहै
  - Akhtar Ansari
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