bahaar aayi zamaana hua kharaabaati | बहार आई ज़माना हुआ ख़राबाती

  - Akhtar Ansari
बहारआईज़मानाहुआख़राबाती
हमारेदिलमेंभीइकलहरकाशजाती
हवाभीसर्दहैभीगीहैरातभीलेकिन
सुलगरहीहैकिसीआगसेमिरीछाती
मिरेपड़ोसमेंयेज़िक्रहैकईदिनसे
सदाजोआतीथीरोनेकीअबनहींआती
लगाकेसीनेसेशादाबियोंकोसोजाता
मुझेबहार-ए-जवानीमेंमौतजाती
बजारहाहैकोईरातमेंसितार'अख़्तर'
धड़करहीहैमिरीआरज़ूओंकीछाती
  - Akhtar Ansari
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