rahne de ye tanj ke nashtar ahl-e-junoon bebaak nahin | रहने दे ये तंज़ के नश्तर अहल-ए-जुनूँ बेबाक नहीं

  - Akhtar Ansari Akbarabadi
रहनेदेयेतंज़केनश्तरअहल-ए-जुनूँबेबाकनहीं
कौनहैअपनेहोशमेंज़ालिमकिसकागरेबाँचाकनहीं
जबथाज़मानादीवानोंकाअबफ़रज़ानेआएहैं
जबसहरामेंलाला-ओ-गुलथेअबगुलशनमेंख़ाकनहीं
फ़ित्नोंकीअर्ज़ानीसेअबएकइकतारआलूदाहै
हमदेखेंकिसकिसकेदामनएकभीदामनपाकनहीं
मौज-ए-तलातुमख़ैरहैंहमसाहिलकेक़रीबआतेहीनहीं
वक़्तकीरौमेंबहजाएँहमऐसेख़स-ओ-ख़ाशाकनहीं
दर्द-ओ-कर्बसेहश्रबपाहोंटोंपेतबस्सुमहै'अख़्तर'
दिलकाआलमकुछभीरहेआँखेंतोमगरनमनाकनहीं
  - Akhtar Ansari Akbarabadi
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