फ़रेब-ए-जल्वाकहाँतकब-रू-ए-काररहे
नक़ाबउठाओकिकुछदिनज़राबहाररहे
ख़राब-ए-शौक़रहेवक़्फ़-ए-इंतिज़ाररहे
अबऔरक्यातिरेवादोंकाए'तिबाररहे
मैंराज़-ए-इश्क़कोरुस्वाकरूँँमआज़-अल्लाह
येबातऔरहैदिलपरनइख़्तियाररहे
चमनमेंरखतोरहाहूँबिनानशेमनकी
ख़ुदाकरेकिज़मानाभीसाज़गाररहे
जुनूँकारुख़हैहरीम-ए-हयातकीजानिब
इलाहीपर्दा-ए-औहाम-ए-ए'तिबाररहे