uda ke phir vahii gard-o-ghubaar pahle sa | उड़ा के फिर वही गर्द-ओ-ग़ुबार पहले सा

  - Akhilesh Tiwari
उड़ाकेफिरवहीगर्द-ओ-ग़ुबारपहलेसा
बुलारहाहैसफ़रबार-बारपहलेसा
वोएकधुँदथीआख़िरकोछटहीजानाथी
दिखाईदेनेलगाआर-पारपहलेसा
नदीनेराहसमुंदरकीफिरवहीपकड़ी
सदाएँदेतारहारेगज़ारपहलेसा
कहींढलानमुक़द्दरहोबुलंदीका
चढ़ाईफिरहोअपनाउतारपहलेसा
सवालक्यूँँचराग़-ए-सहरसकरदेखें
जुनूनअबभीहैक्याबरक़रारपहलेसा
तोक्यापलटकेवहीदिनफिरआनेवालेहैं
कईदिनोंसेहैदिलबे-क़रारपहलेसा
  - Akhilesh Tiwari
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